भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.19 · यस्य सर्वे समारम्भाः
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥
yasya sarve samārambhāḥ kāmasaṃkalpavarjitāḥ |
jñānāgnidagdhakarmāṇaṃ tamāhuḥ paṇḍitaṃ budhāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
जिसके सारे कार्य कामना और संकल्प से रहित हैं, जिसके कर्म ज्ञान की आग में जल चुके हैं, उसे ज्ञानी लोग पण्डित कहते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.19 का अर्थ क्या है?
जिसके सारे कार्य कामना और संकल्प से रहित हैं, जिसके कर्म ज्ञान की आग में जल चुके हैं, उसे ज्ञानी लोग पण्डित कहते हैं।
भगवद्गीता 4.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।