भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 9 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.9 · न च मां तानि कर्माणि

न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनंजय ।
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ॥

na ca māṃ tāni karmāṇi nibadhnanti dhanaṃjaya |
udāsīnavadāsīnamasaktaṃ teṣu karmasu ||

हिन्दी अनुवाद

हे धनञ्जय, ये कर्म मुझे नहीं बाँधते, क्योंकि मैं उनसे अनासक्त रहकर एक तटस्थ व्यक्ति की तरह स्थित रहता हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.9 का अर्थ क्या है?

हे धनञ्जय, ये कर्म मुझे नहीं बाँधते, क्योंकि मैं उनसे अनासक्त रहकर एक तटस्थ व्यक्ति की तरह स्थित रहता हूँ।

भगवद्गीता 9.9 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।