भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 15 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 8.15 · मामुपेत्य पुनर्जन्म

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् ।
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥

māmupetya punarjanma duḥkhālayamaśāśvatam |
nāpnuvanti mahātmānaḥ saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

मुझे पाकर परम सिद्धि तक पहुँचे हुए ये महात्मा फिर उस पुनर्जन्म में नहीं लौटते, जो दुःखों का घर है और क्षणभंगुर है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 8.15 का अर्थ क्या है?

मुझे पाकर परम सिद्धि तक पहुँचे हुए ये महात्मा फिर उस पुनर्जन्म में नहीं लौटते, जो दुःखों का घर है और क्षणभंगुर है।

भगवद्गीता 8.15 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।