भगवद्गीता · अध्याय 7, श्लोक 6 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 7.6 · एतद्योनीनि भूतानि

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥

etadyonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya |
ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayastathā ||

हिन्दी अनुवाद

समझ लो कि समस्त प्राणी इन्हीं दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं। सम्पूर्ण जगत का उद्भव भी मैं हूँ और उसका लय भी मैं ही हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है। इस अध्याय में 30 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 7.6 का अर्थ क्या है?

समझ लो कि समस्त प्राणी इन्हीं दोनों प्रकृतियों से उत्पन्न होते हैं। सम्पूर्ण जगत का उद्भव भी मैं हूँ और उसका लय भी मैं ही हूँ।

भगवद्गीता 7.6 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 7, ज्ञानविज्ञानयोग (ज्ञान-विज्ञान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।