भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 31 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 6.31 · सर्वभूतस्थितं यो मां
सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते ॥
sarvabhūtasthitaṃ yo māṃ bhajatyekatvamāsthitaḥ |
sarvathā vartamāno’pi sa yogī mayi vartate ||
हिन्दी अनुवाद
जो एकत्व में स्थित होकर सब प्राणियों में बसे मुझको भजता है, वह योगी चाहे जिस प्रकार भी रहे, मुझमें ही रहता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 6.31 का अर्थ क्या है?
जो एकत्व में स्थित होकर सब प्राणियों में बसे मुझको भजता है, वह योगी चाहे जिस प्रकार भी रहे, मुझमें ही रहता है।
भगवद्गीता 6.31 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।