भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 3 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 6.3 · आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं
आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते ।
योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥
ārurukṣormuneryogaṃ karma kāraṇamucyate |
yogārūḍhasya tasyaiva śamaḥ kāraṇamucyate ||
हिन्दी अनुवाद
योग पर चढ़ना चाहने वाले मुनि के लिए कर्म को साधन कहा गया है; और जब वह योग पर आरूढ़ हो जाता है, तब उसके लिए शांति (शम) को साधन कहा गया है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 6.3 का अर्थ क्या है?
योग पर चढ़ना चाहने वाले मुनि के लिए कर्म को साधन कहा गया है; और जब वह योग पर आरूढ़ हो जाता है, तब उसके लिए शांति (शम) को साधन कहा गया है।
भगवद्गीता 6.3 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।