भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 6.24 · संकल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा

संकल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः ।
मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥

saṃkalpaprabhavānkāmāṃstyaktvā sarvānaśeṣataḥ |
manasaivendriyagrāmaṃ viniyamya samantataḥ ||

हिन्दी अनुवाद

संकल्प से उठने वाली सब कामनाओं को पूरी तरह त्यागकर, मन से ही इन्द्रियों के समूह को सब ओर से रोककर —

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 6.24 का अर्थ क्या है?

संकल्प से उठने वाली सब कामनाओं को पूरी तरह त्यागकर, मन से ही इन्द्रियों के समूह को सब ओर से रोककर —

भगवद्गीता 6.24 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।