भगवद्गीता · अध्याय 6, श्लोक 14 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 6.14 · प्रशान्तात्मा स्थितः

प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः ।
मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः ॥

praśāntātmā vigatabhīrbrahmacārivrate sthitaḥ |
manaḥ saṃyamya maccitto yukta āsīta matparaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

— शांत मन से, निर्भय होकर, ब्रह्मचर्य के व्रत में दृढ़ रहकर, मन को संयमित करके, चित्त को मुझमें लगाकर, मुझे ही परम लक्ष्य मानकर योगयुक्त होकर बैठे।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है। इस अध्याय में 47 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 6.14 का अर्थ क्या है?

— शांत मन से, निर्भय होकर, ब्रह्मचर्य के व्रत में दृढ़ रहकर, मन को संयमित करके, चित्त को मुझमें लगाकर, मुझे ही परम लक्ष्य मानकर योगयुक्त होकर बैठे।

भगवद्गीता 6.14 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 6, ध्यानयोग (ध्यान योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।