भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 15 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.15 · एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म
एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः ।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥
evaṃ jñātvā kṛtaṃ karma pūrvairapi mumukṣubhiḥ |
kuru karmaiva tasmāttvaṃ pūrvaiḥ pūrvataraṃ kṛtam ||
हिन्दी अनुवाद
यह जानकर ही मुक्ति चाहने वाले प्राचीन लोगों ने भी कर्म किया था। इसलिए तुम भी वैसे ही कर्म करो जैसे पूर्वजों ने पहले किया था।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.15 का अर्थ क्या है?
यह जानकर ही मुक्ति चाहने वाले प्राचीन लोगों ने भी कर्म किया था। इसलिए तुम भी वैसे ही कर्म करो जैसे पूर्वजों ने पहले किया था।
भगवद्गीता 4.15 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।