भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 8 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 3.8 · नियतं कुरु कर्म त्वं
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः ।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ॥
niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ |
śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
तुम अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है। बिना कर्म के तो तुम्हारे शरीर का निर्वाह भी नहीं हो सकता।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 3.8 का अर्थ क्या है?
तुम अपना नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है। बिना कर्म के तो तुम्हारे शरीर का निर्वाह भी नहीं हो सकता।
भगवद्गीता 3.8 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।