भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 35 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 3.35 · श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥

śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt |
svadharme nidhanaṃ śreyaḥ paradharmo bhayāvahaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

भली-भाँति निभाए गए दूसरे के धर्म से अपना धर्म श्रेष्ठ है, भले ही उसमें कमियाँ हों। अपने धर्म में मरना भी कल्याणकारी है; दूसरे का धर्म भय से भरा है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 3.35 का अर्थ क्या है?

भली-भाँति निभाए गए दूसरे के धर्म से अपना धर्म श्रेष्ठ है, भले ही उसमें कमियाँ हों। अपने धर्म में मरना भी कल्याणकारी है; दूसरे का धर्म भय से भरा है।

भगवद्गीता 3.35 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।