भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 3 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.3 · क्लैब्यं मा स्म गमः

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते ।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥

klaibyaṃ mā sma gamaḥ pārtha naitattvayyupapadyate |
kṣudraṃ hṛdayadaurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa ||

हिन्दी अनुवाद

हे पार्थ, इस कायरता के वश में मत हो; यह तुम्हारे योग्य नहीं है। हे परन्तप, हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को झटककर उठ खड़े हो।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.3 का अर्थ क्या है?

हे पार्थ, इस कायरता के वश में मत हो; यह तुम्हारे योग्य नहीं है। हे परन्तप, हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को झटककर उठ खड़े हो।

भगवद्गीता 2.3 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।