भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 69 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 18.69 · न च तस्मान्मनुष्येषु

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः ।
भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि ॥

na ca tasmānmanuṣyeṣu kaścinme priyakṛttamaḥ |
bhavitā na ca me tasmādanyaḥ priyataro bhuvi ||

हिन्दी अनुवाद

मनुष्यों में उससे बढ़कर मेरा प्रिय कार्य करने वाला कोई नहीं है, और न पृथ्वी पर उससे अधिक प्रिय मुझे कोई और होगा।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 18.69 का अर्थ क्या है?

मनुष्यों में उससे बढ़कर मेरा प्रिय कार्य करने वाला कोई नहीं है, और न पृथ्वी पर उससे अधिक प्रिय मुझे कोई और होगा।

भगवद्गीता 18.69 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।