भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 46 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.46 · यतः प्रवृत्तिर्भूतानां
यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् ।
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः ॥
yataḥ pravṛttirbhūtānāṃ yena sarvamidaṃ tatam |
svakarmaṇā tamabhyarcya siddhiṃ vindati mānavaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
जिससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जिससे यह सारा जगत व्याप्त है, उसकी अपने कर्म के द्वारा पूजा करके मनुष्य सिद्धि पाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.46 का अर्थ क्या है?
जिससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जिससे यह सारा जगत व्याप्त है, उसकी अपने कर्म के द्वारा पूजा करके मनुष्य सिद्धि पाता है।
भगवद्गीता 18.46 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।