भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 23 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.23 · नियतं कृतम्
नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषतः कृतम् ।
अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते ॥
niyataṃ saṅgarahitamarāgadveṣataḥ kṛtam |
aphalaprepsunā karma yattatsāttvikamucyate ||
हिन्दी अनुवाद
जो नियत कर्म आसक्ति के बिना, राग और द्वेष के बिना, फल न चाहने वाले व्यक्ति के द्वारा किया जाता है, वह सात्त्विक कहलाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.23 का अर्थ क्या है?
जो नियत कर्म आसक्ति के बिना, राग और द्वेष के बिना, फल न चाहने वाले व्यक्ति के द्वारा किया जाता है, वह सात्त्विक कहलाता है।
भगवद्गीता 18.23 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।