भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 8 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 14.8 · तमस्त्वज्ञानजं विद्धि
तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् ।
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥
tamastvajñānajaṃ viddhi mohanaṃ sarvadehinām |
pramādālasyanidrābhistannibadhnāti bhārata ||
हिन्दी अनुवाद
हे भारत, तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न जानो, जो सभी देहधारियों को मोह में डालता है। वह प्रमाद, आलस्य और नींद के द्वारा बाँधता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 14.8 का अर्थ क्या है?
हे भारत, तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न जानो, जो सभी देहधारियों को मोह में डालता है। वह प्रमाद, आलस्य और नींद के द्वारा बाँधता है।
भगवद्गीता 14.8 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।