भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 9 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 14.9 · सत्त्वं सुखे संजयति रजः

सत्त्वं सुखे संजयति रजः कर्मणि भारत ।
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे संजयत्युत ॥

sattvaṃ sukhe saṃjayati rajaḥ karmaṇi bhārata |
jñānamāvṛtya tu tamaḥ pramāde saṃjayatyuta ||

हिन्दी अनुवाद

हे भारत, सत्त्व सुख में लगाता है और रज कर्म में; पर तम ज्ञान को ढककर प्रमाद में लगाता है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 14.9 का अर्थ क्या है?

हे भारत, सत्त्व सुख में लगाता है और रज कर्म में; पर तम ज्ञान को ढककर प्रमाद में लगाता है।

भगवद्गीता 14.9 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।