भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 7 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.7 · अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा

अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् ।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥

amānitvamadambhitvamahiṃsā kṣāntirārjavam |
ācāryopāsanaṃ śaucaṃ sthairyamātmavinigrahaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

विनम्रता, दम्भ का अभाव, अहिंसा, क्षमाशीलता, सरलता, गुरु की सेवा, पवित्रता, स्थिरता और अपने ऊपर संयम —

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.7 का अर्थ क्या है?

विनम्रता, दम्भ का अभाव, अहिंसा, क्षमाशीलता, सरलता, गुरु की सेवा, पवित्रता, स्थिरता और अपने ऊपर संयम —

भगवद्गीता 13.7 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।