भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 6 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.6 · इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं

इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं संघातश्चेतना धृतिः ।
एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥

icchā dveṣaḥ sukhaṃ duḥkhaṃ saṃghātaścetanā dhṛtiḥ |
etatkṣetraṃ samāsena savikāramudāhṛtam ||

हिन्दी अनुवाद

— इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, शरीर-रूपी संघात, चेतना और धृति — इस प्रकार विकारों सहित यह क्षेत्र संक्षेप में बताया गया।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.6 का अर्थ क्या है?

— इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, शरीर-रूपी संघात, चेतना और धृति — इस प्रकार विकारों सहित यह क्षेत्र संक्षेप में बताया गया।

भगवद्गीता 13.6 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।