भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 3 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.3 · तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च
तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् ।
स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु ॥
tatkṣetraṃ yacca yādṛkca yadvikāri yataśca yat |
sa ca yo yatprabhāvaśca tatsamāsena me śṛṇu ||
हिन्दी अनुवाद
वह क्षेत्र क्या है, कैसा है, उसमें कौन-से विकार होते हैं और वह किससे उत्पन्न होता है; तथा वह क्षेत्रज्ञ कौन है और उसकी क्या शक्ति है — यह सब संक्षेप में मुझसे सुनो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.3 का अर्थ क्या है?
वह क्षेत्र क्या है, कैसा है, उसमें कौन-से विकार होते हैं और वह किससे उत्पन्न होता है; तथा वह क्षेत्रज्ञ कौन है और उसकी क्या शक्ति है — यह सब संक्षेप में मुझसे सुनो।
भगवद्गीता 13.3 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।