भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 2 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.2 · क्षेत्रज्ञं चापि मां
क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत ।
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम ॥
kṣetrajñaṃ cāpi māṃ viddhi sarvakṣetreṣu bhārata |
kṣetrakṣetrajñayorjñānaṃ yattajjñānaṃ mataṃ mama ||
हिन्दी अनुवाद
हे भारत, सभी क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ भी मुझे ही जानो। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का जो ज्ञान है, मेरे मत में वही सच्चा ज्ञान है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.2 का अर्थ क्या है?
हे भारत, सभी क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ भी मुझे ही जानो। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का जो ज्ञान है, मेरे मत में वही सच्चा ज्ञान है।
भगवद्गीता 13.2 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।