भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 22 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.22 · उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता
उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः ।
परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥
upadraṣṭānumantā ca bhartā bhoktā maheśvaraḥ |
paramātmeti cāpyukto dehe’sminpuruṣaḥ paraḥ ||
हिन्दी अनुवाद
इस शरीर में जो परम पुरुष है, उसे साक्षी, अनुमति देने वाला, धारण करने वाला, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा गया है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.22 का अर्थ क्या है?
इस शरीर में जो परम पुरुष है, उसे साक्षी, अनुमति देने वाला, धारण करने वाला, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा भी कहा गया है।
भगवद्गीता 13.22 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।