भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 21 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 13.21 · पुरुषः प्रकृतिस्थो हि
पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् ।
कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥
puruṣaḥ prakṛtistho hi bhuṅkte prakṛtijānguṇān |
kāraṇaṃ guṇasaṅgo’sya sadasadyonijanmasu ||
हिन्दी अनुवाद
प्रकृति में स्थित पुरुष ही प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है। इन गुणों के साथ जुड़ाव ही उसके अच्छी-बुरी योनियों में जन्म लेने का कारण है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 13.21 का अर्थ क्या है?
प्रकृति में स्थित पुरुष ही प्रकृति से उत्पन्न गुणों को भोगता है। इन गुणों के साथ जुड़ाव ही उसके अच्छी-बुरी योनियों में जन्म लेने का कारण है।
भगवद्गीता 13.21 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।