भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 23 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.23 · य एवं वेत्ति पुरुषं च सह

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥

ya evaṃ vetti puruṣaṃ prakṛtiṃ ca guṇaiḥ saha |
sarvathā vartamāno’pi na sa bhūyo’bhijāyate ||

हिन्दी अनुवाद

जो इस प्रकार पुरुष को और गुणों सहित प्रकृति को जान लेता है, वह किसी भी प्रकार का जीवन जीते हुए भी फिर जन्म नहीं लेता।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.23 का अर्थ क्या है?

जो इस प्रकार पुरुष को और गुणों सहित प्रकृति को जान लेता है, वह किसी भी प्रकार का जीवन जीते हुए भी फिर जन्म नहीं लेता।

भगवद्गीता 13.23 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।