भगवद्गीता · अध्याय 13, श्लोक 11 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 13.11 · अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं

अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् ।
एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥

adhyātmajñānanityatvaṃ tattvajñānārthadarśanam |
etajjñānamiti proktamajñānaṃ yadato’nyathā ||

हिन्दी अनुवाद

— आत्मा के ज्ञान में निरन्तर लगे रहना और तत्त्वज्ञान के लक्ष्य को समझना — इसी को ज्ञान कहा गया है; जो इसके विपरीत है, वह अज्ञान है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 13.11 का अर्थ क्या है?

— आत्मा के ज्ञान में निरन्तर लगे रहना और तत्त्वज्ञान के लक्ष्य को समझना — इसी को ज्ञान कहा गया है; जो इसके विपरीत है, वह अज्ञान है।

भगवद्गीता 13.11 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 13, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।