भगवद्गीता · अध्याय 10, श्लोक 16 · अर्जुन
भगवद्गीता 10.16 · वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या
वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः ।
याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि ॥
vaktumarhasyaśeṣeṇa divyā hyātmavibhūtayaḥ |
yābhirvibhūtibhirlokānimāṃstvaṃ vyāpya tiṣṭhasi ||
हिन्दी अनुवाद
जिन दिव्य विभूतियों के द्वारा आप इन लोकों में व्याप्त होकर स्थित हैं, अपनी उन विभूतियों का आप ही पूरा वर्णन करने में समर्थ हैं; कृपया उन्हें बताइए।
प्रसंग
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 10.16 का अर्थ क्या है?
जिन दिव्य विभूतियों के द्वारा आप इन लोकों में व्याप्त होकर स्थित हैं, अपनी उन विभूतियों का आप ही पूरा वर्णन करने में समर्थ हैं; कृपया उन्हें बताइए।
भगवद्गीता 10.16 किसने कहा है?
यह श्लोक अर्जुन ने अध्याय 10, विभूतियोग (विभूति योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।