भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 26 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.26 · पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥

patraṃ puṣpaṃ phalaṃ toyaṃ yo me bhaktyā prayacchati |
tadahaṃ bhaktyupahṛtamaśnāmi prayatātmanaḥ ||

हिन्दी अनुवाद

जो कोई भक्ति से मुझे एक पत्ता, एक फूल, एक फल या थोड़ा-सा जल अर्पित करता है, उस शुद्ध मन वाले के प्रेम से दिए गए उस उपहार को मैं स्वीकार कर लेता हूँ।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.26 का अर्थ क्या है?

जो कोई भक्ति से मुझे एक पत्ता, एक फूल, एक फल या थोड़ा-सा जल अर्पित करता है, उस शुद्ध मन वाले के प्रेम से दिए गए उस उपहार को मैं स्वीकार कर लेता हूँ।

भगवद्गीता 9.26 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।