भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 25 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 9.25 · यान्ति देवव्रता

यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः ।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ॥

yānti devavratā devānpitṝnyānti pitṛvratāḥ |
bhūtāni yānti bhūtejyā yānti madyājino’pi mām ||

हिन्दी अनुवाद

देवताओं के उपासक देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों के उपासक पितरों को, भूत-प्रेतों को पूजने वाले भूतों को, और मेरी पूजा करने वाले मुझे ही प्राप्त होते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 9.25 का अर्थ क्या है?

देवताओं के उपासक देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों के उपासक पितरों को, भूत-प्रेतों को पूजने वाले भूतों को, और मेरी पूजा करने वाले मुझे ही प्राप्त होते हैं।

भगवद्गीता 9.25 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।