भगवद्गीता · अध्याय 9, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 9.20 · त्रैविद्या मां सोमपाः
त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा
यज्ञैरिष्ट्वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते ।
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोक-
मश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान् ॥
traividyā māṃ somapāḥ pūtapāpā
yajñairiṣṭvā svargatiṃ prārthayante |
te puṇyamāsādya surendraloka-
maśnanti divyāndivi devabhogān ||
हिन्दी अनुवाद
तीनों वेदों के ज्ञाता, सोमरस पीकर पापों से शुद्ध हुए लोग यज्ञों द्वारा मेरी पूजा करके स्वर्ग जाने की प्रार्थना करते हैं। वे पुण्य से प्राप्त इन्द्रलोक में पहुँचकर स्वर्ग में देवताओं के दिव्य भोग भोगते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है। इस अध्याय में 34 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 9.20 का अर्थ क्या है?
तीनों वेदों के ज्ञाता, सोमरस पीकर पापों से शुद्ध हुए लोग यज्ञों द्वारा मेरी पूजा करके स्वर्ग जाने की प्रार्थना करते हैं। वे पुण्य से प्राप्त इन्द्रलोक में पहुँचकर स्वर्ग में देवताओं के दिव्य भोग भोगते हैं।
भगवद्गीता 9.20 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 9, राजविद्याराजगुह्ययोग (राजविद्या राजगुह्य योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।