भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 9 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 8.9 · कविं

कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥

kaviṃ purāṇamanuśāsitāramaṇoraṇīyāṃsamanusmaredyaḥ |
sarvasya dhātāramacintyarūpamādityavarṇaṃ tamasaḥ parastāt ||

हिन्दी अनुवाद

जो उस सर्वज्ञ, अनादि, सबके शासक, सूक्ष्म से भी सूक्ष्म, सबके धारणकर्ता, अचिन्त्य रूप वाले, सूर्य के समान प्रकाशमान और अन्धकार से परे परमात्मा का ध्यान करता है —

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 8.9 का अर्थ क्या है?

जो उस सर्वज्ञ, अनादि, सबके शासक, सूक्ष्म से भी सूक्ष्म, सबके धारणकर्ता, अचिन्त्य रूप वाले, सूर्य के समान प्रकाशमान और अन्धकार से परे परमात्मा का ध्यान करता है —

भगवद्गीता 8.9 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।