भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 24 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 8.24 · अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः
अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् ।
तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः ॥
agnirjyotirahaḥ śuklaḥ ṣaṇmāsā uttarāyaṇam |
tatra prayātā gacchanti brahma brahmavido janāḥ ||
हिन्दी अनुवाद
अग्नि, ज्योति, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के छह महीने — इस मार्ग से प्रयाण करने वाले ब्रह्मवेत्ता ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 8.24 का अर्थ क्या है?
अग्नि, ज्योति, दिन, शुक्ल पक्ष और उत्तरायण के छह महीने — इस मार्ग से प्रयाण करने वाले ब्रह्मवेत्ता ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।
भगवद्गीता 8.24 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।