भगवद्गीता · अध्याय 8, श्लोक 17 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 8.17 · सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो

सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः ।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥

sahasrayugaparyantamaharyadbrahmaṇo viduḥ |
rātriṃ yugasahasrāntāṃ te’horātravido janāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

जो जानते हैं कि ब्रह्मा का एक दिन एक हजार युगों का होता है और उसकी रात भी एक हजार युगों पर ही समाप्त होती है, वे लोग दिन और रात का सच्चा रहस्य जानते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 8.17 का अर्थ क्या है?

जो जानते हैं कि ब्रह्मा का एक दिन एक हजार युगों का होता है और उसकी रात भी एक हजार युगों पर ही समाप्त होती है, वे लोग दिन और रात का सच्चा रहस्य जानते हैं।

भगवद्गीता 8.17 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 8, अक्षरब्रह्मयोग (अक्षर ब्रह्म योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।