भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 9 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.9 · जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः ।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥
janma karma ca me divyamevaṃ yo vetti tattvataḥ |
tyaktvā dehaṃ punarjanma naiti māmeti so’rjuna ||
हिन्दी अनुवाद
हे अर्जुन, जो मेरे इस दिव्य जन्म और कर्म को तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर छोड़ने के बाद फिर जन्म नहीं लेता, बल्कि मुझे प्राप्त होता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.9 का अर्थ क्या है?
हे अर्जुन, जो मेरे इस दिव्य जन्म और कर्म को तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर छोड़ने के बाद फिर जन्म नहीं लेता, बल्कि मुझे प्राप्त होता है।
भगवद्गीता 4.9 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।