भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 5 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 4.5 · बहूनि मे व्यतीतानि तव

बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन ।
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥

bahūni me vyatītāni janmāni tava cārjuna |
tānyahaṃ veda sarvāṇi na tvaṃ vettha parantapa ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: हे अर्जुन, मेरे और तुम्हारे बहुत-से जन्म हो चुके हैं। मैं उन सबको जानता हूँ, पर हे परन्तप, तुम उन्हें नहीं जानते।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 4.5 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: हे अर्जुन, मेरे और तुम्हारे बहुत-से जन्म हो चुके हैं। मैं उन सबको जानता हूँ, पर हे परन्तप, तुम उन्हें नहीं जानते।

भगवद्गीता 4.5 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।