भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 26 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 4.26 · श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये

श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति ।
शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति ॥

śrotrādīnīndriyāṇyanye saṃyamāgniṣu juhvati |
śabdādīnviṣayānanya indriyāgniṣu juhvati ||

हिन्दी अनुवाद

कुछ लोग सुनने आदि इन्द्रियों को संयम की अग्नि में होम करते हैं, और कुछ शब्द आदि विषयों को इन्द्रियों की अग्नि में होम करते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 4.26 का अर्थ क्या है?

कुछ लोग सुनने आदि इन्द्रियों को संयम की अग्नि में होम करते हैं, और कुछ शब्द आदि विषयों को इन्द्रियों की अग्नि में होम करते हैं।

भगवद्गीता 4.26 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।