भगवद्गीता · अध्याय 4, श्लोक 11 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 4.11 · ये यथा मां प्रपद्यन्ते
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
ye yathā māṃ prapadyante tāṃstathaiva bhajāmyaham |
mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
जो जिस भाव से मेरी शरण लेते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार अपनाता हूँ। हे पार्थ, सब मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग पर चलते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 42 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 4.11 का अर्थ क्या है?
जो जिस भाव से मेरी शरण लेते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार अपनाता हूँ। हे पार्थ, सब मनुष्य हर प्रकार से मेरे ही मार्ग पर चलते हैं।
भगवद्गीता 4.11 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 4, ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (ज्ञान-कर्म-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।