भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 30 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 3.30 · मयि सर्वाणि कर्माणि
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा ।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥
mayi sarvāṇi karmāṇi saṃnyasyādhyātmacetasā |
nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ ||
हिन्दी अनुवाद
अपने सारे कर्म मुझे अर्पित करके, चित्त को आत्मा में लगाकर, आशा और ममता से रहित होकर, मन का संताप छोड़कर युद्ध करो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 3.30 का अर्थ क्या है?
अपने सारे कर्म मुझे अर्पित करके, चित्त को आत्मा में लगाकर, आशा और ममता से रहित होकर, मन का संताप छोड़कर युद्ध करो।
भगवद्गीता 3.30 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।