भगवद्गीता · अध्याय 3, श्लोक 13 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 3.13 · यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो
यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ।
भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् ॥
yajñaśiṣṭāśinaḥ santo mucyante sarvakilbiṣaiḥ |
bhuñjate te tvaghaṃ pāpā ye pacantyātmakāraṇāt ||
हिन्दी अनुवाद
यज्ञ से बचा हुआ अन्न खाने वाले सज्जन सब पापों से छूट जाते हैं; पर जो केवल अपने लिए पकाते हैं, वे पाप ही खाते हैं।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है। इस अध्याय में 43 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 3.13 का अर्थ क्या है?
यज्ञ से बचा हुआ अन्न खाने वाले सज्जन सब पापों से छूट जाते हैं; पर जो केवल अपने लिए पकाते हैं, वे पाप ही खाते हैं।
भगवद्गीता 3.13 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 3, कर्मयोग (कर्म योग — कर्म का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।