भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 38 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.38 · सुखदुःखे समे कृत्वा

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥

sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau |
tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi ||

हिन्दी अनुवाद

सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ। इस प्रकार तुम्हें पाप नहीं लगेगा।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.38 का अर्थ क्या है?

सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ। इस प्रकार तुम्हें पाप नहीं लगेगा।

भगवद्गीता 2.38 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।