भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 30 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.30 · देही नित्यमवध्योऽयं देहे

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत ।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥

dehī nityamavadhyo’yaṃ dehe sarvasya bhārata |
tasmātsarvāṇi bhūtāni na tvaṃ śocitumarhasi ||

हिन्दी अनुवाद

हे भारत, सबके शरीर में रहने वाला यह आत्मा सदा अवध्य है। इसलिए किसी भी प्राणी के लिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.30 का अर्थ क्या है?

हे भारत, सबके शरीर में रहने वाला यह आत्मा सदा अवध्य है। इसलिए किसी भी प्राणी के लिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।

भगवद्गीता 2.30 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।