भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 20 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 2.20 · न जायते म्रियते वा
न जायते म्रियते वा कदाचिन्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥
na jāyate mriyate vā kadācin
nāyaṃ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ |
ajo nityaḥ śāśvato’yaṃ purāṇo
na hanyate hanyamāne śarīre ||
हिन्दी अनुवाद
आत्मा न कभी जन्म लेता है, न कभी मरता है; ऐसा नहीं कि वह एक बार होकर फिर न रहे। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है; शरीर के मारे जाने पर भी वह नहीं मारा जाता।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 2.20 का अर्थ क्या है?
आत्मा न कभी जन्म लेता है, न कभी मरता है; ऐसा नहीं कि वह एक बार होकर फिर न रहे। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है; शरीर के मारे जाने पर भी वह नहीं मारा जाता।
भगवद्गीता 2.20 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।