भगवद्गीता · अध्याय 2, श्लोक 11 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 2.11 · अशोच्यानन्वशोचस्त्वं

अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे ।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥

aśocyānanvaśocastvaṃ prajñāvādāṃśca bhāṣase |
gatāsūnagatāsūṃśca nānuśocanti paṇḍitāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

श्रीभगवान बोले: तुम उनके लिए शोक कर रहे हो जो शोक के योग्य नहीं, और फिर भी ज्ञानियों जैसी बातें करते हो। ज्ञानी न मरे हुओं के लिए शोक करते हैं, न जीवितों के लिए।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है। इस अध्याय में 72 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 2.11 का अर्थ क्या है?

श्रीभगवान बोले: तुम उनके लिए शोक कर रहे हो जो शोक के योग्य नहीं, और फिर भी ज्ञानियों जैसी बातें करते हो। ज्ञानी न मरे हुओं के लिए शोक करते हैं, न जीवितों के लिए।

भगवद्गीता 2.11 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 2, साङ्ख्ययोग (सांख्य योग — ज्ञान का योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।