भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 7 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.7 · नियतस्य तु संन्यासः
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते ।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥
niyatasya tu saṃnyāsaḥ karmaṇo nopapadyate |
mohāttasya parityāgastāmasaḥ parikīrtitaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
नियत कर्म का संन्यास उचित नहीं है। मोह के कारण उसका त्याग तामस त्याग कहा गया है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.7 का अर्थ क्या है?
नियत कर्म का संन्यास उचित नहीं है। मोह के कारण उसका त्याग तामस त्याग कहा गया है।
भगवद्गीता 18.7 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।