भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 66 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.66 · सर्वधर्मान्परित्यज्य
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥
sarvadharmānparityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja |
ahaṃ tvā sarvapāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ ||
हिन्दी अनुवाद
सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा — शोक मत करो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.66 का अर्थ क्या है?
सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा — शोक मत करो।
भगवद्गीता 18.66 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।