भगवद्गीता · अध्याय 18, श्लोक 63 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 18.63 · इति ते ज्ञानमाख्यातं मया
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया ।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥
iti te jñānamākhyātaṃ guhyādguhyataraṃ mayā |
vimṛśyaitadaśeṣeṇa yathecchasi tathā kuru ||
हिन्दी अनुवाद
इस प्रकार मैंने तुम्हें यह ज्ञान बताया, जो गुप्त से भी अधिक गुप्त है। इस पर पूरी तरह विचार करो, फिर जैसा चाहो वैसा करो।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है। इस अध्याय में 78 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 18.63 का अर्थ क्या है?
इस प्रकार मैंने तुम्हें यह ज्ञान बताया, जो गुप्त से भी अधिक गुप्त है। इस पर पूरी तरह विचार करो, फिर जैसा चाहो वैसा करो।
भगवद्गीता 18.63 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 18, मोक्षसंन्यासयोग (मोक्ष-संन्यास योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।