भगवद्गीता · अध्याय 17, श्लोक 4 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 17.4 · यजन्ते सात्त्विका राजसाः

यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाः ।
प्रेतान्भूतगणांश्चान्ये यजन्ते तामसा जनाः ॥

yajante sāttvikā devānyakṣarakṣāṃsi rājasāḥ |
pretānbhūtagaṇāṃścānye yajante tāmasā janāḥ ||

हिन्दी अनुवाद

सात्त्विक लोग देवताओं को पूजते हैं, राजस लोग यक्षों और राक्षसों को, और दूसरे तामस लोग प्रेतों और भूतगणों को पूजते हैं।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 17.4 का अर्थ क्या है?

सात्त्विक लोग देवताओं को पूजते हैं, राजस लोग यक्षों और राक्षसों को, और दूसरे तामस लोग प्रेतों और भूतगणों को पूजते हैं।

भगवद्गीता 17.4 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।