भगवद्गीता · अध्याय 17, श्लोक 19 · श्रीकृष्ण
भगवद्गीता 17.19 · मूढग्राहेणात्मनो क्रियते
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः ।
परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥
mūḍhagrāheṇātmano yatpīḍayā kriyate tapaḥ |
parasyotsādanārthaṃ vā tattāmasamudāhṛtam ||
हिन्दी अनुवाद
जो तप मूर्खतापूर्ण हठ से, अपने को पीड़ा देकर, या किसी दूसरे का अनिष्ट करने के लिए किया जाता है, वह तामस कहलाता है।
प्रसंग
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 28 श्लोक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भगवद्गीता 17.19 का अर्थ क्या है?
जो तप मूर्खतापूर्ण हठ से, अपने को पीड़ा देकर, या किसी दूसरे का अनिष्ट करने के लिए किया जाता है, वह तामस कहलाता है।
भगवद्गीता 17.19 किसने कहा है?
यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 17, श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धात्रय विभाग योग) में कहा है।
संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।