भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 3 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 14.3 · मम योनिर्महद्ब्रह्म

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् ।
संभवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥

mama yonirmahadbrahma tasmingarbhaṃ dadhāmyaham |
saṃbhavaḥ sarvabhūtānāṃ tato bhavati bhārata ||

हिन्दी अनुवाद

हे भारत, महद् ब्रह्म अर्थात मूल प्रकृति मेरी योनि है; उसी में मैं बीज रखता हूँ, और उसी से सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 14.3 का अर्थ क्या है?

हे भारत, महद् ब्रह्म अर्थात मूल प्रकृति मेरी योनि है; उसी में मैं बीज रखता हूँ, और उसी से सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

भगवद्गीता 14.3 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।