भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 17 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 14.17 · सत्त्वात्संजायते ज्ञानं

सत्त्वात्संजायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च ।
प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥

sattvātsaṃjāyate jñānaṃ rajaso lobha eva ca |
pramādamohau tamaso bhavato’jñānameva ca ||

हिन्दी अनुवाद

सत्त्व से ज्ञान उत्पन्न होता है और रज से लोभ; तम से प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं, और अज्ञान भी।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 14.17 का अर्थ क्या है?

सत्त्व से ज्ञान उत्पन्न होता है और रज से लोभ; तम से प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं, और अज्ञान भी।

भगवद्गीता 14.17 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।