भगवद्गीता · अध्याय 14, श्लोक 16 · श्रीकृष्ण

भगवद्गीता 14.16 · कर्मणः सुकृतस्याहुः फलम्

कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् ।
रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ॥

karmaṇaḥ sukṛtasyāhuḥ sāttvikaṃ nirmalaṃ phalam |
rajasastu phalaṃ duḥkhamajñānaṃ tamasaḥ phalam ||

हिन्दी अनुवाद

अच्छे कर्म का फल सात्त्विक और निर्मल कहा गया है; रजोगुण का फल दुःख है और तमोगुण का फल अज्ञान।

प्रसंग

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है। इस अध्याय में 27 श्लोक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवद्गीता 14.16 का अर्थ क्या है?

अच्छे कर्म का फल सात्त्विक और निर्मल कहा गया है; रजोगुण का फल दुःख है और तमोगुण का फल अज्ञान।

भगवद्गीता 14.16 किसने कहा है?

यह श्लोक श्रीकृष्ण ने अर्जुन से अध्याय 14, गुणत्रयविभागयोग (गुणत्रय विभाग योग) में कहा है।

संस्कृत पाठ पारंपरिक है और सार्वजनिक डोमेन में है। हिन्दी अनुवाद हमारा अपना है।